भूरी सिंह हाइड्रो पावर हाउस, हिमाचल का पहला तथा भारत का दूसरा हाइड्रो पावर हाउस,

आज हम आप को हिमाचल प्रदेश में स्तिथ एक ऐसे हाइड्रो पावर हाउस यह के बारे में बताने जा रहे है जो हिमाचल का नहीं बल्कि भारत का दूसरा बिजली घर था,

जी हां हम बात क्र रहे है, भूरी सिंह पॉवर प्रोजेट की, यह उत्तर भारत का पहला और देश का दूसरा हाइड्रो पावर हाउस हैं।

1902 में कर्नाटक के शिवानासमुद्रा में देश का पहला हाइड्रो पावर प्लांट बना था

जानकारी के अनुसार 1902 में कर्नाटक के शिवानासमुद्रा में देश का पहला हाइड्रो पावर प्लांट बनाया गया था तथा इसके बाद वर्ष 1908 में हिमाचल प्रदेश के चंबा

जिले के तत्कालीन महान शासक भूरी सिंह ने हाइड्रो पावर हाउस (35 किलोवाट-डीसी) का निर्माण करवाकर चंबा को रोशन किया था तथा इसे के बाद पहली बार चम्बा में रौशनी आ थी।

पावर हाउस को आउटसोर्स कर निजी हाथों में सौंप दिया

बताया जाता है इस की स्थापना के बाद से ही पावर हाउस में विद्युत उत्पादन का सिलसिला जारी रहा है, इस पावर हाउस में उत्पादित बिजली की आपूर्ति शहर के विभिन्न हिस्सों में की जाती है साथ ही वर्तमान में बिजली

बोर्ड ने इस पावर हाउस को आउटसोर्स कर निजी हाथों में सौंप दिया है, साथ ही यहां उत्पादित बिजली की खरीद-फरोख्त बोर्ड के माध्यम से की जाती है। इस पावर हाउस में रोजाना 6 हजार यूनिट विद्युत उत्पादित की जाती है।

हाइड्रो पावर हाउस को बनाने पर उस समय 2.75 लाख रुपये खर्च आया

इस ऐतिहासिक हाइड्रो पावर हाउस को बनाने पर उस समय 2.75 लाख रुपये खर्च आया था, साथ ही 1938 तक इस स्‍टेशन की क्षमता 35 किलोवाट (डीसी)मतलब

की लगभग 47 ब्रेक हॉर्सपावर होती थी, साथ ही इस की एक रोचक बात यह है कि वर्तमान में बना भूरी सिंह पावर हाउस शुरू में यहां से करीब 125 किमी दूरी पर बनाया गया था।

1938 में इस स्‍टेशन की क्षमता 100 किलोवाट (डीसी) और बढ़ा दी गई

जिसे 1938 में तत्कालीन शासक राजा शाम सिंह ने यहां शिफ्ट कर दिया था। 1938 में इस स्‍टेशन की क्षमता 100 किलोवाट (डीसी) और बढ़ा दी गई।

उसके बाद 1958 में 100 किलोवाट (एसी) का एक और सेट लगाया गया तथा इसकी कुल क्षमता 250 किलोवाट हो गई अपने आप में ही यह एक बहुत ही लोकप्रिय पावर प्रोजेक्ट था।

चंबा के स्टेट चीफ इंजीनियर गुरूदिता लाल महाजन ने ऑफिस के दस्तावेजों में दी थी जानकारी

इसी के साथ 1938 के बाद उस वक्‍त चंबा के स्टेट चीफ इंजीनियर गुरूदिता लाल महाजन ने इस पावर हाऊस की देखरेख की साथ ही उन्होंने अपने ऑफिस के दस्तावेजों में इस बात का जिक्र किया है कि जब वे चंबा में

मैट्रिक के पेपरों की तैयारी कर रहे थे। तो बिजली की रोशनी में पढ़ाई की और किसी काम से लाहौर गए थे तो केरोसिन तेल के दीये की रोशनी में काम करना पड़ा था।

एचपीएसईबी के चेयरमैन कैलाश चंद महाजन ने 50 लाख रुपये खर्च कर इसकी क्षमता 250 किलोवाट और बढ़ाई थी

इसी के साथ 1985 में चंबा के स्टेट चीफ इंजीनियर गुरूदिता लाल महाजन के बेटे और एचपीएसईबी के चेयरमैन कैलाश चंद महाजन ने 50 लाख रुपये खर्च कर इसकी क्षमता 250 किलोवाट और बढ़ाई थी इस लिए

कहा जाता है की इस पावर प्रोजेक्ट में स्टेट चीफ इंजीनियर गुरूदिता लाल महाजन का भी अहम योगदान रहा है। जो कि कुल 450 किलोवाट हो गई, इसी के साथ वर्तमान में इसकी क्षमता 450 किलोवाट की ही है।

महान राजा भूरि सिंह पावर हाउस साल नदी के किनारे पर बना हुआ

इसी के साथ चम्बा के महान राजा भूरि सिंह पावर हाउस साल नदी के किनारे पर बना हुआ है, यह नदी रावी कली एक सहायक नहीं है, इसी के साथ एक और

दिलचस्प बात और हिअ है कि 1905 के दौरान दिल्ली में जॉन फ्लेमिंग ने डीजल पावर स्टेशन बनाया था।

साथ ही उन्हें Indian Electricity Act 1903 के तहत पावर स्टेशन बनाने की अनुमति दी गई थी। इसी के साथ प्राप्त जानकारी के अनुसार बताया जाता है की

इससे पूरी राजधानी रोशन नहीं हो पाई थी, इसी लिए यह सिर्फ हाई क्लास लोगों की जरूरतें पूरी करने के लिए बनाया गया था।

Related Posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *