पार्वती जलविधुत परियोजना देश की सबसे बड़ी जलविद्युत परियोजनाओं में से एक

हिमाचल प्रदेश में स्तिथ बहुत सी विभिन्न जलविधुत परियोजनाएं स्तिथ है जिन में से एक है पार्वती परियोजना यह जल विधुत परियोजना तीन अलग अलग चरणों में विभाजित है,

प्राप्त जानकारी के अनुसार यहां अलग-अलग तीन स्थानों पर बिजली पैदा की जाएगी, साथ ही पहले चरण में 750 मेगावाट, दूसरे में 800 मेगावाट और तीसरे चरण में 501 मेगावाट बिजली पैदा की जाती है।

राज्य के हिस्से की 03 प्रतिशत ‘विद्युत उत्पादन लागत’ पर मिलेगी

इसी के साथ यह परियोजना हिमाचल प्रदेश के जिला कुल्लू में स्तिथ है, इसी के साथ पावर्ती परियोजना पर एक ऐतिहासिक समझौता विद्युत दोहन के क्षेत्र में एक लंबी छलांग लगाई है इसी के साथ इस परियोजना से हिमाचल प्रेदश को 12 प्रतिशत विद्युत निःशुल्क तथा केंद्र के हिस्से की 15 प्रतिशत एवं राज्य के हिस्से की 15

प्रतिशत एवं राज्य के हिस्से की 03 प्रतिशत ‘विद्युत उत्पादन लागत’ पर मिलेगी हिमाचल प्रदेश की यह सबसे बड़ी जल विद्युत परियोजनाएं है।

लगभग 400 करोड़ रुपए का वार्षिक राजस्व प्राप्त होगा

इसी के साथ इस अनुबंध की विशेषता यह भी है कि हिमाचल प्रदेश को दी जाने वाली बिजली अक्तूबर से मार्च के मध्य मिलेगी इसी के साथ जिससे हिमाचल प्रदेश सरकार को लगभग 400 करोड़ रुपए का वार्षिक राजस्व प्राप्त होगा, इसी के

साथ इस पार्वती परियोजना कुल्लू की तीन समीपस्थ दुर्गम घाटियों ने स्तिथ है, इस लोकप्रिय पार्वती, गड़सा व सैंज में स्थित है।

करीब 10 हजार करोड़ रुपए की लागत से बनने वाली यह परियोजना हिमाचल प्रदेश के लिए महत्त्वपूर्ण

प्राप्त जानकारी के अनुसार यह महत्त्वाकांक्षी परियोजना देश की सबसे बड़ी परियोजनाओं में से एक मानी जाती है। तथा इसकी क्षमता 2051 मेगावाट की हो जायेगी इसी के साथ करीब 10 हजार करोड़ रुपए की लागत से

बनने वाली यह परियोजना हिमाचल प्रदेश के लिए महत्त्वपूर्ण है साथ ही 03 चरणों में बनने वाली पार्वती पन- बिजली परियोजना से प्रति वर्ष 850 करोड़ यूनिट बिजली पैदा होगी, जो हिमाचल प्रदेश ही नहीं भारत की एक अहम परियोजना है।

पहले चरण में 750 मेगावाट तथा दूसरे चरण में 800 मेगावाट तथा तीसरे चरण में 501 मेगावाट बिजली पैदा होगी

हिमाचल प्रदेश की यह पार्वती परियोजना की 03 चरणों में अलग-अलग स्थानों पर बिजली पैदा की जाएगी। प्राप्त जानकारी के अनुसार इस परियोजना के पहले चरण में 750 मेगावाट तथा दूसरे चरण में 800 मेगावाट

तथा तीसरे चरण में 501 मेगावाट बिजली पैदा होगी, इसी के साथ सबसे पहले द्वितीय चरण इसके बाद तृतीय चरण का निमार्ण कार्य किया जाता है, साथ ही प्रथम चरण का निर्माण इन दोनों के निर्माण कार्य के बाद होगा।

केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण से तकनीकी एवं आर्थिक स्वीकृति प्राप्त हो चुकी है

इसी के साथ दूसरे चरण के निर्माण कार्य के लिए केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण से तकनीकी एवं आर्थिक स्वीकृति प्राप्त हो चुकी है कुल्लू में स्तिथ इस परियोजना को बहुत ही अहम परियोजना मानी जाती है।

इसका काम पूरे जोरों पर है साथ ही इस पार्वती परियोजना के इस चरण के लिए 90 मीटर ऊंचा बांध बनाकर पार्वती नदी का पानी पुल्गा नामक स्थान की ओर मोड़ दिया जाएगा।

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