IIT मंडी के शोधकर्ताओं ने किया दावा, शुगर कम करेगी नशा छुड़वाने की दवा

IIT MANDI

हिमाचल प्रदेश प्रौद्योगिकी संस्थान मंडी के शोधकर्ताओं ने एक ऐसी प्रक्रिया का खुलासा कर दिया है, जिससे शरीर में इंसुलिन की अधिकता से इंसुलिन प्रतिरोध पैदा होता है, जी हां प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रौद्योगिकी

संस्थान मंडी के शोधकर्ताओं ने एक ऐसा अविष्कार किया है, जिसका डायबिटीज से संबंध है। उन्होंने यह देखा कि अफीम के नशे के इलाज में उपयोगी दवा से इस प्रक्रिया में सुधार करना मुमकिन है।

परिणाम हाल में जर्नल ऑफ बायोलॉजिकल केमिस्ट्री में प्रकाशित हुए

इसी के साथ विज्ञान एवं इंजीनियरिंग अनुसंधान बोर्ड (एसईआरबी) के अनुदान से वित्त पोषित इस अनुसंधान के परिणाम हाल में जर्नल ऑफ बायोलॉजिकल केमिस्ट्री में प्रकाशित हुए हैं, साथ ही इस शोध पत्र के प्रमुख

वैज्ञानिक डा. प्रोसनजीत मोंडल एसोसिएट प्रोफेसर स्कूल ऑफ बेसिक साइंसेज और अध्ययन के सह-परीक्षण शोध विद्वान व्यक्ति है।

आईआईटी मंडी के अभिनव चैबे और ख्याति गिरधर सीएसआईआर-आईआईटीआर शामिल रहे

इसी के साथ आईआईटी मंडी के अभिनव चैबे और ख्याति गिरधर सीएसआईआर-आईआईटीआर, लखनऊ के डा. देवव्रतघोष, दिल्ली-एनसीआर, सोनीपत, हरियाणा के डा. मनोज कुमार यादव भी इस शोध में शामिल रहे हैं।

इसमें उन्होंने जानकारी देते हुए बताया है कि इंसुलिन पैनक्रियाज में बनने वाला हार्मोन हैं, जो इसका इस्तेमाल कोशिकाएं खून से ग्लूकोज ग्रहण करने में करती हैं।

शुगर को भगाएगी अफीम का नशा छुड़ाने वाली दवा

इसी के साथ कई कारणों से कोशिकाएं इंसुलिन इस्तेमाल करने की क्षमता खो देती हैं, तो टाइप-2 डायबिटीज होता है साथ ही इंसुलिन प्रतिरोध का संबंध हाइपरइनसुलिनेमिया नामक समस्या से है,

जिसमें रक्तप्रवाह में जरूरत से ज्यादा इंसुलिन बना रहता है इसी लिए डा. मोंडल ने बताया जिन्हें भरोसा है कि यह टाइप-2 डायबिटीज के उपाचार का व्यावहारिक रास्ता हो सकता है।

नाल्ट्रेक्सोन पहले से एफडीए से मंजूर दवा

जिस को लेकर यह शोध किया गया है, साथ ही नाल्ट्रेक्सोन पहले से एफडीए से मंजूर दवा है, जिसका उपयोग अफीम की लत के उपचार में किया जाता है और अब इसका उपयोग एक अन्य उद्देश्य शरीर में सूजन और

डायबिटीज़ की रोकथाम के लिए किया जा सकता है यह एक बहुत ही लाभदायक शोध किया गया है, जिस से कई आकार के लाभ प्राप्त किये जा सकते है।

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