पिछले 03 महीने से से बारिश न होने से किसानों को भारी नुकसान

himachal

हिमाचल प्रदेश में पिछले 03 महीने से से बारिश न होने से किसानों को भारी नुकसान झेलना पड़ा है, प्राप्त जानकारी के अनुसार बताया जा रहा है की प्रदेश के जिला काँगड़ा के नूरपुर क्षेत्र में खेतों के लिए पानी की सुविधा

न होने से वहां के किसान केवल बारिश के भरोसे ही खेती करते हैं, इसी के साथ इस बार लंबे समय से बारिश न होने से फसलों को समय पर पानी नहीं मिल पाया।

सुलयाली क्षेत्र में होने वाली देसी कुल्थ व माश की फसल नष्ट

इसी एक साथ उपमंडल नूरपुर के सुलयाली क्षेत्र में होने वाली देसी कुल्थ व माश की फसल नष्ट हो गई है, इसी के साथ इस क्षेत्र में देसी कुल्थ और माश का उत्पादन करने वाले अग्रणी किसान वरिंद्र पठानिया, कालू भडवाल,

दच्छु जट्ट, अरुण पठानिया और चमन सिंह आदि ने जानकारी देते हुए बताया कि इस क्षेत्र की देसी कुल्थ दाल की उत्तर भारत में काफी मांग रहती है।

देसी दाल कुछ विशिष्ट औषधीय गुणों से चलते पथरी की दवाई बनाने में भी प्रयुक्त की जाती

जो जल्दी व स्वादिष्ट बनने वाली यह देसी दाल कुछ विशिष्ट औषधीय गुणों से चलते पथरी की दवाई बनाने में भी प्रयुक्त की जाती है, इसी के साथ देसी माश भी

जल्द पकने और स्वादिष्ट बनने के कारण मांग पर रहते हैं, जानकारी के अनुसार बताया जा रहा है की किसानों ने फसल को जानवरों को खाने के लिए छोड़ दिया है।

प्रतिवर्ष देसी माश व कुल्थ से एक लाख से ज्यादा की आमदनी हो जाती थी

इसी के साथ फसल का उत्पादन करने वाले कृषक वीरेंद्र पठानिया ने बताया कि प्रतिवर्ष देसी माश व कुल्थ से एक लाख से ज्यादा की आमदनी हो जाती थी, प्राप्त जानकारी के अनुसार बताया जा रहा है की इसके अलावा

देसी दवाई बनाने वाली कंपनी भी प्रति वर्ष 40 हजार से अधिक की कुल्थ दाल ले जाते थे साथ ही किसानों ने सरकार से फसल खराब होने पर मुआवजे की गुहार लगाई है, इस बार बारिश ना होने की बजह से किसानो को बारी मात्रा में नुकसान हुआ है।

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