07 दिसंबर से धर्मशाला में प्रस्तावित विधानसभा के शीतकालीन सत्र पर संशय

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हिमाचल प्रदेश में 07 दिसंबर से धर्मशाला में प्रस्तावित विधानसभा के शीतकालीन सत्र के आयोजन पर संशय बन गया है, प्राप्त जानकारी के अनुसार बताया जा रहा है की 05 दिवसीय इस सत्र के स्थगित होने की पूरी

संभावना बन गई है, इसी के साथ बताया जा रहा है की इसके चलते प्रदेश की जयराम सरकार ने पहली दिसंबर को कैबिनेट बुलाई है।

जयराम मंत्रिमंडल ने 23 नवंबर की कैबिनेट में धर्मशाला के शीतकालीन सत्र को मंजूरी प्रदान की थी

इसी के साथ बताया जा रहा है की मंगलवार दोपहर बाद आयोजित होने वाली मंत्रिमंडल की इस बैठक में सत्र के स्थगन पर फैसला हो सकता है, इसी के साथ जयराम मंत्रिमंडल ने 23 नवंबर की कैबिनेट में धर्मशाला के शीतकालीन सत्र को मंजूरी प्रदान की थी, साथ ही अब इस मुद्दे पर दोबारा कैबिनेट की बैठक बुलाया जाना है,

साथ ही यह स्पष्ट संकेत है कि सत्र अब कुछ महीनों के लिए लटक सकता है तथा जाहिर है कि सत्र के 07 दिसंबर से 11 दिसंबर के बीच आयोजन की कैबिनेट ने हरी झंडी दे दी थी।

हरी झंडी के बाद कांग्रेस ने सत्र के आयोजन पर अपनी अलग प्रतिक्रिया जारी की थी

इसी के साथ अगर सत्र का आयोजन निर्धारित समय पर होना है, तो मंगलवार को कैबिनेट बुलाए जाने का कोई कारण नहीं दिखता इसी के साथ हालांकि पिछली

कैबिनेट में दी गई हरी झंडी के बाद कांग्रेस ने सत्र के आयोजन पर अपनी अलग प्रतिक्रिया जारी की थी।

जयराम ठाकुर ने तुरंत प्रभाव से सर्वदलीय बैठक बुलाने को कहा

जानकारी के अनुसार इसी कारण मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने तुरंत प्रभाव से सर्वदलीय बैठक बुलाने को कहा था तथा संसदीय कार्य मंत्री सुरेश भारद्वाज की

अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक के दौरान कांग्रेस, माकपा व निर्दलीय विधायक ने शीतकालीन सत्र को निर्धारित समय पर करने को जोर दिया था।

पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह भी संक्रमण के बीच धर्मशाला में शीतकालीन सत्र के हक में नहीं

इसी के साथ कांग्रेस के दिग्गज नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह भी संक्रमण के बीच धर्मशाला में शीतकालीन सत्र के हक में नहीं थे। इसी कारण मुख्यमंत्री

जयराम ठाकुर ने इस मसले पर मंगलवार को फिर कैबिनेट की बैठक बुलाई है, जिस पर आज निर्णय लिया जाएगा।

आयोजन का फैसला सर्वदलीय बैठक में सरकार पर छोड़ दिया

सर्वदलीय बैठक में बनी सहमति के बाद यह फैसला लिया गया था कि सत्र का आयोजन हर हाल में होना चाहिए। इसके आयोजन का फैसला सर्वदलीय बैठक में सरकार पर छोड़ दिया था। बहरहाल इसके बाद कांग्रेस के

कुछ विधायक भी सत्र के विरोध में दिख रहे थे। पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार ने भी इन परिस्थितियों में सत्र आयोजित न करने की सरकार को सलाह दी है।

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