कोरोना काल में हिमाचल का अगला वार्षिक बजट भी अब बदले हुए स्वरूप में ही होगा

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हिमाचल प्रदेश में कोरोना काल में अब न तो अनुसूचित जाति और न ही अनुसूचित जनजाति की उपयोजना होगी, प्राप्त जानकारी के अनुसार बताया जा रहा है की इन वर्गों की उपयोजनाओं को अब विकास कार्यक्रम का

नाम दिया गया है, साथ ही बताया जा रहा है की अगला बजट अब नए स्वरूप में सामने होगा, इसी के साथ इस योजना और गैर योजना की मदों को भी खत्म किया जा रहा है।

पूंजीगत और राजस्व व्यय इन 02 भागों में ही विभाजित किया जा रहा

इसी के साथ वित्तीय वर्ष 2020-21 के इस बजट को अब पूंजीगत और राजस्व व्यय इन 02 भागों में ही विभाजित किया जा रहा है, साथ ही इन दिनों बजट का

नया स्वरूप तैयार किया जा रहा है, इसी के साथ कोरोना काल में हिमाचल प्रदेश का अगला वार्षिक बजट भी अब बदले हुए स्वरूप में ही होगा।

2021-22 के बजट को अब केवल राजस्व और पूंजीगत व्यय के रूप में ही रखा जाएगा

इसी के साथ हिमाचल प्रदेश में अगले वार्षिक बजट यानी वित्त वर्ष 2021-22 के बजट को अब केवल राजस्व और पूंजीगत व्यय के रूप में ही रखा जाएगा, साथ ही

हिमाचल प्रदेश में नए बजट में अब अनुसूचित जाति उप योजना नहीं होगी, इसी के साथ इसे अब अनुसूचित जाति विकास कार्यक्रम यानी एससीडीपी नाम दिया गया है।

अनुसूचित जनजाति उपयोजना यानी टीएएसपी को भी खत्म किया गया

प्राप्त जानकारी के अनुसार बताया जा रहा है की इसी तरह अब अनुसूचित जनजाति उपयोजना यानी टीएएसपी को भी खत्म किया गया है, इसी के साथ इसका अब जनजातीय क्षेत्र विकास कार्यक्रम यानी टीएडीपी का नामकरण किया गया है,

साथ ही पिछड़ा क्षेत्र उप रोजनार यानी बीएएसपी को एस्पेरेशनल ब्लॉक्स विकास कार्यक्रम यानी एबीडीपी नाम दिया गया है, इसी साथ अब यह कहा जा रहा है की इस बार बजट की रुपरेखा अलग हो सकती है।

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