भारत में चल रहे किसान आंदोलन को लेकर बोले पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार

shanta kumar himachal

भारत सरकार के संघर्ष के वैसे मोड़ पर पहुंच गई है, प्राप्त जानकारी के अनुसार बताया जा रहा है की जैसे मोड़ पर आज से 30 वर्ष पहले 1990 में हिमाचल प्रदेश सरकार पहुंची थी, इसी के साथ बताया जा रहा है की भारतीय

जनता पार्टी के नेता एवं हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार ने जानकारी देते हुए कहा है कि हमने बिजली उत्पादन में निजी क्षेत्र को लाने का महत्त्वपूर्ण निर्णय किया है।

सरकार के सभी कर्मचारियों ने हड़ताल कर दी

इसी के साथ उसी पर बिजली कर्मचारी हड़ताल पर चले गए, साथ ही बताया जा रहा है की कुछ दिन के बाद सरकार के सभी कर्मचारियों ने हड़ताल कर दी साथ ही उन्होंने कहा कि कर्मचारियों को बहुत समझाया कि

हिमाचल प्रदेश में 21 हजार मैगावाट बिजली क्षमता है, साथ ही सरकारों के पास पैसा नहीं है, पर कर्मचारियों पर कोई असर नहीं पड़ा है।

पड़ोस के कुछ प्रदेशों के सरकारी कर्मचारी भी उनकी मदद करने लगे

इसी के साथ सरकार का कामकाज ठप हो गया है, साथ ही तोड़-फोड़ होने लगी है, प्राप्त जानकारी के अनुसार उन्होंने कहा कि सब सोच कर सरकार ने ऐतिहासिक ‘काम नहीं, तो दाम नहीं’ का निर्णय किया है, इसी के साथ

इससे आंदोलन और उग्र होने लगा है, साथ ही पड़ोस के कुछ प्रदेशों के सरकारी कर्मचारी भी उनकी मदद करने लगे है।

हिमाचल के पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार ने कहा कि उन्हें दिल्ली बुलाया गया

साथ ही हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार ने कहा कि उन्हें दिल्ली बुलाया गया है, इसी के साथ सब तरफ से दबाव था कि कर्मचारियों से समझौता किया जाए, साथ ही अंत में उन्हें सलाह दी गई कि जैसे भी हो

हड़ताल समाप्त करवाई जाए, क्योंकि हिमाचल प्रदेश की राजनीति सरकारी कर्मचारियों के सहयोग के बिना नहीं चल सकती है।

उन्होंने कहा था कि मेरे लिए सुशासन राजनीति से ऊपर है

इसी के साथ मुझे याद है कि स्व. अरुण जेतली ने कहा था कि यद्धपि मेरा निर्णय सुशासन का है, इसी के साथ परंतु राजनीति की दृष्टि से यह गलत है, साथ ही तब

उन्होंने कहा था कि मेरे लिए सुशासन राजनीति से ऊपर है, साथ ही हिमाचल प्रदेश में भी अधिकतर दबाव निर्णय वापस लेने का था।

भारत सरकार इस कल्याणकारी निर्णय को लागू करने में पीछे नहीं हटेगी

इसी के साथ पार्टी को भी लगा कि निर्णय भले ही अच्छा हो साथ ही परंतु इससे राजनीतिक नुकसान अधिक होगा, इसी के साथ 29 दिन तक हड़ताल चली है,

साथ ही उन्होंने कहा कि मुझे विश्वास है कि भारत सरकार इस कल्याणकारी निर्णय को लागू करने में पीछे नहीं हटेगी।

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