मंडी के आईआईटी ने टीबी के रोगियों के लिए स्वदेशी रैपिड किट की तैयार

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हिमाचल प्रदेश और देश भर में फैले कोरोना वायरस की बजह से प्रदेश में टीबी रोग की पहचान के लिए अब चीन या अन्य देशों में बनी रैपिड टेस्ट किट पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा,

प्राप्त जानकारी के अनुसार बताया जा रहा है की जल्द ही स्वदेशी रैपिड किट भारतीय बाजारों में उतरेगी, इसी के साथ इससे आम लोग भी घर बैठे टीबी की जांच कर सकेंगे।

मंडी के आईआईटी में बेसिक साइंस विभाग ने इस किट को तैयार करने में सफलता प्राप्त की

इसी के साथ हिमाचल के जिला मंडी के आईआईटी में बेसिक साइंस विभाग ने इस किट को तैयार करने में सफलता प्राप्त की है, साथ ही 2017 में साइंस एंड

इंजीनियरिंग रिसर्च बोर्ड ने आईआईटी मंडी को यह जिम्मा सौंपा था, इसी के साथ जिसे अब आईसीएमआर ने हरी झंडी दे दी है, साथ ही यह शोध प्रकाशित भी हो चुका है।

कोरोना काल में अब इस शोध से देश भर में टीबी रोगियों की शीघ्र पहचान हो सकेगी

हिमाचल प्रदेश और देश भर में कोरोना काल में अब इस शोध से देश भर में टीबी रोगियों की शीघ्र पहचान हो सकेगी, इसी के साथ कुछ मिनट में किट के इस्तेमाल से रोगियों में टीबी का पता लग जाएगा,

जिस से प्रदेश और अन्य राज्यों के लोगो को भी इस किट का लाभ मिल पायेगा, साथ ही यह भी बताया जा रहा है की यह प्रेग्नेंसी किट की भांति ही होगी।

आईसीएमआर ने हाल ही में टीबी रोगियों की ट्रूनेट तकनीक को भी विकसित किया

इसी के साथ मंडी के आईआईटी प्रोफेसर डॉ. सरिता आजाद ने बताया कि किट से संबंधित शोध साइंस एंड इंजीनियरिंग रिसर्च बोर्ड को सौंपा जा चुका है,

इसी के साथ आईसीएमआर ने हाल ही में टीबी रोगियों की ट्रूनेट तकनीक को भी विकसित किया है, साथ ही जिसे डब्ल्यूएचओ ने विश्व टीबी उन्मूलन कार्यक्रम में शामिल किया गया है।

देश में टीबी रोगियों के इलाज के लिए राष्ट्रीय स्तर पर कार्यक्रम चलया जा रहा

इसी के साथ देश में टीबी रोगियों के इलाज के लिए राष्ट्रीय स्तर पर कार्यक्रम चलया जा रहा है, इसी के साथ इस वर्ष 1997 में भारत के संशोधित राष्ट्रीय टीबी

रोग नियंत्रण कार्यक्रम के बाद WHO ने डायरेक्टली ऑब्जर्ड ट्रीटमेंट शॉर्ट कोर्स (डाट्स) को भारत में लागू किया था,

06 देश ऐसे भी जिसमे दुनिया भर के 60 फीसदी टीबी रोगी शामिल

साथ ही विश्व में भारत समेत 06 देश ऐसे भी जिसमे दुनिया भर के 60 फीसदी टीबी रोगी शामिल हैं, साथ ही भारत में आरएनटीसीपी के तहत हिमाचल प्रदेश के 08 जिलों समेत देश भर के 730 जिलों में यह कार्यक्रम चलया जा रहा है।

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