चम्बा के लेसुई पंचायत के सारवां गांव की यहां पर बिना बीजे ही सरसों उगती

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हिमाचल प्रदेश के जिला चंबा में कई अचंभित करने वाले साक्ष्य आज भी मौजूद हैं, प्राप्त जानकारी के अनुसार बताया जा रहा है की अब इन्हें देवीय चमत्कार कहें या फिर अनजान रहस्य कहा जा रहा है की जिन पर अभी भी संश्य बरकरार है।

ग्रामीण सरसों का तेल निकालने और सब्जी बनाने के लिए करते

साथ ही यहां बात हो रही है कि हिमाचल प्रदेश के जिला चम्बा के चुराह विस क्षेत्र की लेसुई पंचायत के सारवां गांव की यहां पर बिना बीजे ही सरसों उगती है, इसी के साथ जिसका उपयोग ग्रामीण सरसों का तेल निकालने और सब्जी बनाने के लिए करते हैं।

मां अंजना देवी ने शर्त रखी कि जिसकी तरफ अधिक धूप निकलती

जानकारी के अनुसार बताया जा रहा है की परगना लौहटिकरी निवासी 75 वर्षीय बलदेव और शिक्षा विभाग से सेवानिवृत्त 67 वर्षीय नारायण स्वरूप ने जानकारी देते हुए बताया कि सतयुग में मेहलनाग और उनके भाई

बैसुखी नाग में जब संपत्ति का बटवारा होने लगा तो उनकी मां अंजना देवी ने शर्त रखी कि जिसकी तरफ अधिक धूप निकलती है, उसे मेहलवार धार का परिक्षेत्र दिया जाएगा।

अंजना देवी ने मेहलनाग को झूठ प्रदर्शित करने पर 12 वर्ष का क्षेत्र से निकाला दिया

इसी के साथ मां की शर्त को जीतने के लिए मेहलनाग ने सिंधुरी रंग में कपड़े रंग-रंग कर इलाके में बिछा दिए साथ ही जिसकी भनक लगते ही अंजना देवी ने

मेहलनाग को झूठ प्रदर्शित करने पर 12 वर्ष का क्षेत्र से निकाला दिया साथ ही यह भी कहा जाता है की मेहलनाग वहां से लौहटिकरी परगना के सारवां गांव में श्यामाभट्ट के घर

पहुंचा और आश्रय लिया तथा श्यामा भट्ट की पुत्री पुन्नीभट्ट से मेहलनाग का प्रेम प्रसंग हो गया है, इसी के साथ कहा जा रहा है की यह अपने आप में ही यह एक बहुत ही अद्भुत और विचित्र स्थान है, जिसे बेहद धार्मिक माना जाता है।

 

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