लाहौल की पट्टन घाटी में नववर्ष के उपलक्ष्य पर उत्तना पर्व धूमधाम से मनाया गया

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हिमाचल प्रदेश के जिला लाहौल स्पीति जिसे शीत मरुस्थल के नाम से भी जाना जाता है, यहां की पट्टन घाटी में नववर्ष के उपलक्ष्य पर उत्तना पर्व धूमधाम से मनाया गया है, प्राप्त जानकारी के अनुसार बताया जा रहा है की

मान्यता है कि इस पर्व के बाद लाहौल स्पीति की विभिन्न घाटियों में शीत ऋतु में मनाए जाने वाले त्योहार शुरू हो जाते हैं।

जनजीवन, भाषा, संस्कृति, परंपराएं, खान-पान, रीति-रिवाज के लिए लोकप्रिय यह त्यौहार

इसी के साथ बताया जा रहा है की यहां की कठिन भौगोलिक परिस्थितियां, जनजीवन, भाषा, संस्कृति, परंपराएं, खान-पान, रीति-रिवाज और वेशभूषा हरेक त्योहार को आकर्षक और अनुपम बनाती हैं, जिसे देखने के लिए देश

विदेश से पर्टयक यहां पहुंचते है, जबकि उत्तना पर्व के दिन घाटी के लोग सत्तू का बना टोटू(स्थानीय व्यंजन) बनाकर अपने-अपने ईष्ट देवताओं को चढ़ाकर पूजा-अर्चना करते हैं।

चंद्रभागा संगम में लोगों ने शून्य से 18 डिग्री नीचे तापमान में आस्था का डुबकी लगाई

इसी के साथ चंद्रभागा संगम में लोगों ने शून्य से 18 डिग्री नीचे तापमान में आस्था का डुबकी लगाई है तथा एक-दूसरे को नववर्ष की बधाई दी, साथ ही गोशाल के

ग्रामीणों ने पारंपरिक स्वादिष्ट व्यंजनों का आदान-प्रदान भी किया है, हिमाचल प्रदेश में मनाया जाने वाला यह एक बहुत ही लोकप्रिय और प्रसिद्ध त्यौहार है।

देवी-देवताओं के मंदिरों के कपाट 03 महीने के लिए बंद

साथ ही हिंदू बाहुल्य पट्टन घाटी में उत्तना पर्व के बाद सभी देवी-देवताओं के मंदिरों के कपाट 03 महीने के लिए बंद हो गए हैं, जानकारी के अनुसार अब चैत्र महीना शुरू होने के बाद ही इन मंदिरों के कपाट खुलेंगे इस घाटी वासियों ने उत्तना पर्व को मिलजुल कर मनाया ह।

त्रिलोकनाथ, गोंधला और सिस्सू में बागामी 02 माह में उत्सवों की धूम रहेगी

जानकारी के अनुसार इस दौरान घाटी में खुशहाली और समृद्धि की देवी-देवताओं से मंगल कामना भी की गई साथ ही घाटी के, सिस्सू, उदयपुर मारबल, मालंग,

मेलिग, शांशा जालमा, त्रिलोकनाथ, गोंधला और सिस्सू में बागामी 02 माह में उत्सवों की धूम रहेगी।

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