पांवटा साहिब में 06 जिला परिषद वार्डों के परिणाम घोषित, परिषद की सियासी तस्वीर साफ

panchayat himachal

हिमाचल प्रदेश में जिला परिषद सिरमौर में सियासी संकट गहरा हो गया है, प्राप्त जानकारी के अनुसार बताया जा रहा है की हिमाचल के जिला सिरमौर के पांवटा

साहिब में 06 जिला परिषद वार्डों के परिणाम घोषित होते ही जिला परिषद की सियासी तस्वीर साफ हो गई है।

चुनाव में कांग्रेस और भाजपा का प्रदर्शन बराबरी पर छूटा

इसी के साथ कहा जा रहा है की इस बार के चुनाव में कांग्रेस और भाजपा का प्रदर्शन बराबरी पर छूटा है, साथ ही प्रदेश में सियासत के इस खेल में दोनों ही

राजनीतिक दल 8-8 सीटें जीतने में कामयाब हुए है, हालांकि, बहुमत के लिए जरूरी 9 का आंकड़ा दोनों दल नहीं छू पाए है।

बतौर निर्दलीय प्रत्याशी चुनाव में उतरीं नीलम शर्मा की भूमिका अब अहम हो गई

साथ ही लिहाजा, पच्छाद क्षेत्र के बाग पशोग से बतौर निर्दलीय प्रत्याशी चुनाव में उतरीं नीलम शर्मा की भूमिका अब अहम हो गई है, इसी के साथ ही अपने दम पर

चुनाव जीतने वाली नीलम के हाथ सत्ता की चाबी आ गई है, इसी के साथ नीलम का फैसला तय करेगा कि जिला परिषद की सत्ता में कांग्रेस काबिज होगी या भाजपा।

पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव को लें तो इस बार भाजपा का प्रदर्शन बेहतर रहा

साथ ही वर्ष 2015 में हुए पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव को लें तो इस बार भाजपा का प्रदर्शन बेहतर रहा है तथा पिछले चुनाव में कांग्रेस का पलड़ा भारी था

साथ ही इस चुनाव में कांग्रेस ने सबसे अधिक 12 सीटें जीतकर सत्ता पर कब्जा जमाया था तथा 04 सीटें भाजपा और 01 सीट पर सीपीआईएम के उम्मीदवार विजय हुए थे।

इस बार भाजपा ने 04 सीटों की बढ़ोतरी कर 08 पर जीत दर्ज की

प्राप्त जानकारी के अनुसार बताया जा रहा है की इस बार भाजपा ने 04 सीटों की बढ़ोतरी कर 08 पर जीत दर्ज की है, साथ ही कांग्रेस का गढ़ माने जाने वाले शिल्हा और कमरऊ वार्ड भी उनके हाथ से फिसल गए हैं, इसी के

साथ हिमाचल प्रदेश भाजपा अध्यक्ष एवं सांसद सुरेश कश्यप के गृह क्षेत्र से बतौर निर्दलीय उम्मीदवार जीतने वाली नीलम शर्मा के हाथ सत्ता की चाबी होने से दोनों दल अब उसे अपनी ओर करने के लिए सियासी दांवपेंच भिड़ा रहे हैं।

निर्दलीय प्रत्याशी इसी वर्ग से संबंधित

इसी के साथ अध्यक्ष पद अन्य पिछड़ा वर्ग की महिला के लिए आरक्षित होने से सियासी पारा और चढ़ने की संभावना बताई है, बताया जा रहा है कि निर्दलीय

प्रत्याशी इसी वर्ग से संबंधित है तथा ऐसे में दोनों ही दल उन्हें अध्यक्ष पद सौंपकर अपनी ओर करने का प्रयास कर सकते हैं।

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