कांगड़ा की घरोह पंचायत के प्रभात ठाकुर ने बनाया 100 % आटोमेटिक फीचर वाला स्वदेशी ड्रोन

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हिमाचल प्रदेश के जिला कांगड़ा की घरोह पंचायत के प्रभात ठाकुर ने प्रदेश तथा अपने परिजनों का नाम रोशन किया है, इसी के साथ प्राप्त जानकारी के अनुसार बताया जा रहा है की बिना रिमोट के चलने वाला पहला स्वदेशी ड्रोन बनाया है।

ड्रोन गूगल मैप की मदद से स्थान का पता लगाकर वहां दवाइयां या जरूरी सामान पहुंचा देगा

साथ ही कहा जा रहा है की यह ड्रोन गूगल मैप की मदद से स्थान का पता लगाकर वहां दवाइयां या जरूरी सामान पहुंचा देगा, साथ ही बताया जा रहा है की काँगड़ा के प्रभात ठाकुर ने 100 फीसदी आटोमेटिक फीचर वाला स्वदेशी ड्रोन तैयार किया है।

यह ड्रोन पहाड़ी राज्यों के दुर्गम क्षेत्रों में मददगार होगा

साथ ही यह ड्रोन पहाड़ी राज्यों के दुर्गम क्षेत्रों में मददगार होगा, इसी के साथ कहा जा रहा है की अगर बीच रास्ते में ड्रोन की बैटरी खत्म होने लगेगी या फिर सिगनल टूट जाने का खतरा होगा तो यह जहां से उड़ान भरी थी, वहां खुद सुरक्षित वापस आ जाएगा।

स्वदेशी माइक्रो प्रोसेसर चैलेंज प्रतियोगिता में टॉप 100 में पहुंच गया

प्राप्त जानकारी के अनुसार बताया जा रहा है की कोर इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र के विशेषज्ञ प्रभात का यह स्वदेशी ड्रोन केंद्र सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की स्वदेशी माइक्रो प्रोसेसर चैलेंज प्रतियोगिता

में टॉप 100 में पहुंच गया है, साथ ही बताया जा रहा है की इस प्रतियोगिता के पहले चरण में देश की करीब 6000 कंपनियों ने हिस्सा लिया था।

इस ड्रोन को एक क्रांतिकारी आविष्कार के तौर पर माना जा रहा

साथ ही कहा जा रहा है की देश के दुर्गम क्षेत्रों में सामान पहुंचाने के लिए इस ड्रोन को एक क्रांतिकारी आविष्कार के तौर पर माना जा रहा है, जो पहाड़ी के क्षेत्रो में

बेहद लाभदयक रहेगा, साथ ही आपात स्थिति में किसी भी क्षेत्र में दवाइयां आदि पहुंचाने में यह बड़ा मददगार साबित होगा।

सॉफ्टवेयर 100 फीसदी और हार्डवेयर भी 75 फीसदी भारत में ही निर्मित

इसी के साथ ड्रोन में उपयोग किया गया सॉफ्टवेयर 100 फीसदी और हार्डवेयर भी 75 फीसदी भारत में ही निर्मित है, इसी के साथ कहा जा रहा है की भारत में इस समय दो-तीन कंपनियां ही स्वदेशी सॉफ्टवेयर का उपयोग कर रही हैं।

अब प्रभात टॉप 25 के लिए प्रोजेक्ट पर काम कर रहे

साथ ही बाकी कंपनियां ड्रोन बनाते वक्त ज्यादातर सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर विदेशों से आयात कर उन्हें असेंबल करने का काम करती हैं, इसी के साथ केंद्र सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने उन्हें

एक लाख रुपये की राशि बतौर इनाम दी है, साथ ही कहा जा रहा है की अब प्रभात टॉप 25 के लिए प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं।

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