प्रदेश की अर्थव्यवस्था को राज्य आबकारी शुल्क एवं वैट की संजीवनी का सहारा

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देश प्रदेश में फैले कोरोना वायरस की बजह से आर्थिक तंगी से जूझ रहे हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था को राज्य आबकारी शुल्क एवं वैट की संजीवनी का सहारा है, प्राप्त जानकारी के अनुसार बताया जा रहा है की हिमाचल प्रदेश को जीएसटी मुआवजे के एवज मिलने वाली करोड़ों की मदद भी जून से बंद होगी।

03 सालों में हिमाचल प्रदेश की राजस्व प्राप्तियों में करीब 1700 करोड़ का इजाफे का अनुमान

इसी के साथ कहा जा रहा है की ऐसे में प्रदेश सरकार को अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए न सिर्फ खर्चों में कटौती की सोचनी होगी, बल्कि सरकार को अपना कर राजस्व भी बढ़ाना होगा, साथ ही कहा जा रहा है की वैट व आबकारी शुल्क में अनुमानित वृद्धि की वजह से आगामी 03 सालों में हिमाचल प्रदेश की राजस्व प्राप्तियों में करीब 1700 करोड़ का इजाफा होने का अनुमान लगाया जा रहा है।

प्रदेश का अपना कर राजस्व में आबकारी शुल्क का अहम योगदान

साथ ही कहा जा रहा है की इसके बावजूद इसके वेतन व पेंशन के बढ़ते खर्चों व राजस्व घाटा अनुदान में कटौती की वजह से हिमाचल प्रदेश को कर्ज लेने पर विवश होना पड़ सकता है, साथ ही कहा जा रहा है की जानकारी के मुताबिक प्रदेश का अपना कर राजस्व में आबकारी शुल्क का अहम योगदान है।

आबकारी शुल्क के एवज खजाने में 2020 करोड़ की रकम आने का अनुमान लगाया गया

साथ ही बताया जा रहा है की हिमाचल प्रदेश में चालू साल के करीब 1800 करोड़ के मुकाबले आगामी वित्त वर्ष में आबकारी शुल्क के एवज खजाने में 2020 करोड़ की रकम आने का अनुमान लगाया गया है, साथ ही प्रदेश सरकार इसके अलावा 2022-23 में 2282 तथा 2023-24 में 2579 करोड़ की रकम आबकारी शुल्क के एवज में खजाने में आने का अनुमान वित्तीय जानकारों ने लगाया है।

वर्तमान में खजाने में 1685 करोड़ की रकम आने का अनुमान लगाया जा रहा

साथ ही बताया जा रहा है की हिमाचल में वैट से वर्तमान में खजाने में 1685 करोड़ की रकम आने का अनुमान लगाया जा रहा है की साथ ही आगामी साल में वैट से करीब 1875 करोड़ की रकम खजाने में आना अनुमानित है, तथा 2022-23 में 2076 तथा 2023-24 में करीब 2304 करोड़ की रकम वैट से खजाने में आने की संभावना जताई जा रही है, जिससे प्रदेश की आर्थिक स्तिथि में सुधार आ सकता है।

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