ऊना के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय खड्ड में प्राचीन महाभारत दर्पण ग्रंथ प्राप्त

himachal pradesh mhabhart

हिमाचल प्रदेश के जिला ऊना के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय खड्ड में प्राचीन महाभारत दर्पण ग्रंथ प्राप्त हुआ है, इसी के साथ प्राप्त जानकारी के

अनुसार स्कूल के स्टोर के एक ट्रंक को जब स्कूल प्रशासन ने खोला तो उसमें यह ग्रंथ मिला है, साथ ही इसके काफी पन्नों को चूहों ने कुतर दिया है।

काफी बड़े इस ग्रंथ को देखकर स्कूल का स्टाफ भी हैरान

मगर काफी बड़े इस ग्रंथ को देखकर स्कूल का स्टाफ भी हैरान है, इसी के साथ बताया जा रहा है की स्कूल में मिले इस ग्रंथ को सहेज कर रखा गया है और इसकी जानकारी शिक्षा विभाग के उच्चाधिकारियों को भी दी गई है।

अवलोकन के बाद ही यह पता चल पाएगा कि आखिर यह ग्रंथ कब लिखा गया

कहा जा रहा है की अवलोकन के बाद ही यह पता चल पाएगा कि आखिर यह ग्रंथ कब लिखा गया है तथा इसकी मूल भाषा कौन सी है, साथ ही कहा जा रहा है की खड्ड स्कूल में जब प्रिंसिपल ने इस ग्रंथ को देखा तो इसके

महत्व का पता चला साथ ही बताया जा रहा है की यह काफी पुराना तथा ऐतिहासिक माना जा रहा है और इसमें अंकित की गई भाषा न तो हिंदी है और न ही यह संस्कृत है।

इस ग्रंथ के कवर पेज पर महाभारत दर्पण प्रथम भाग लिखा गया

प्राप्त जानकारी के अनुसार बताया जा रहा है की अब इस बात का पता लगाया जाएगा कि आखिर यह भाषा कौन सी है और किस क्षेत्र की है, तथा इस ग्रंथ के कवर पेज पर महाभारत दर्पण प्रथम भाग लिखा गया है साथ

ही इसमें आदि सभा वन पर्व का उल्लेख किया गया है तथा इस ग्रंथ में महाराजाधिराज श्री उदित नारायण काशीराज द्वारा स्वरचित का उल्लेख भी किया गया है।

वर्ष 1928 में जिला ऊना के हरोली क्षेत्र के तहत गांव खड्ड में स्कूल की स्थापना की गई

इसी के साथ कहा जा रहा है की इसके आगे का पूरा विवरण किस भाषा में है, इसकी जानकारी तभी मिलेगी, जब इसका पूरा अवलोकन किया जाएगा, साथ ही वर्ष 1928 में जिला ऊना के हरोली क्षेत्र के तहत गांव खड्ड में स्कूल की स्थापना की गई थी।

खराब पड़े सामान को निकाला गया तो उसमें एक ट्रंक से यह ग्रंथ प्राप्त हुआ

इसी के साथ ही स्कूल के प्रधानाचार्य हरीश साहनी ने जानकारी देते हुए बताया कि स्कूल के वर्षों से बंद पड़े स्टोर से जब खराब पड़े सामान को निकाला गया तो उसमें एक ट्रंक से यह ग्रंथ प्राप्त हुआ है, हालांकि इसके कुछ पन्ने

चूहों ने कुतर दिए हैं लेकिन 75 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा सुरक्षित बचा हुआ है, कहा जा रहा है की अभी तक इसका पता नहीं चल पाया है कि इसमें अंकित भाषा कौन सी है तथा इस ऐतिहासिक ग्रंथ को किस भाषा में लिखा गया है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *