बिना लाइसेंस के क्लीनिक चलाने वाले पपरोला के व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज

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हिमाचल प्रदेश में फर्जी डाक्टरों के कई मामले सामने आ रहे है, प्राप्त जानकारी के अनुसार बताया जा रहा है की हिमाचल के जिला काँगड़ा के पालमपुर में सामने आया है,

ऐसे ही एक मामले में न्यायालय ने आरोपी को दोष सिद्ध होने पर कड़ी सजा सुनाई है, कहा जा रहा है की हिमाचल प्रदेश के तहत जिला कांगड़ा के बिना लाइसेंस

क्लीनिक चलाने वाले पपरोला के व्यक्ति के खिलाफ दोष सिद्ध होने पर न्यायालय ने दोषी को 03 साल कारावास व 01 लाख रुपए जुर्माना की सजा सुनाई है।

बीड़ में बिना लाइसेंस एक व्यक्ति लोगों के स्वास्थ्य की जांच कर रहा था

इसी के साथ ही केस की जानकारी देते हुए जिला न्यायवादी राजेश वर्मा ने बताया कि ड्रग इंस्पेक्टर को शिकायतें मिल रहीं थी कि काँगड़ा की लोकप्रिय पर्टयक स्थान बीड़ में बिना लाइसेंस एक व्यक्ति लोगों के स्वास्थ्य की जांच कर रहा है।

11 प्रकार के एलोपैथी दवाइयां बरामद हुईं

इसी दौरान शिकायत पर कार्रवाई करते हुए ड्रग इंस्पेक्टर आशीष रैणा ने 12 मार्च, 2010 को तिब्बेतन कालोनी के पास मै. सरस्वती क्लीनिक में दबिश दी तथा इस दौरान क्लीनिक से 11 प्रकार के एलोपैथी दवाइयां बरामद हुईं है।

इंडियन बोर्ड ऑफ अल्टरनेटिव मेडिसिन का सर्टिफिकेट

साथ ही कहा जा रहा है की यह दवाईयां अधिकतर सभी सामान्य बीमारियों के लिए थीं, जानकारी के अनुसार इस दौरान क्लीनिक संचालक से लाइसेंस मांगा गया था

तथा क्लीनिक संचालक बिहारी लाल निवासी पपरोला ने तर्क दिया कि उसके पास इंडियन बोर्ड ऑफ अल्टरनेटिव मेडिसिन का सर्टिफिकेट है।

बैजनाथ में 18-सी ड्रग कॉस्मेटिक एक्ट 1940 के तहत केस दर्ज

साथ ही बताया जा रहा है की इसी के आधार पर वह फैक्टरियों से दवाइयां मंगवाता है और यहां लोगों को बेचता है, कहा जा रहा है की इसके अलावा व्यक्ति के पास किसी भी तरह का कोई सर्टिफिकेट नहीं था तथा बिना

लाइसेंस व बिल के दवाइयां बेचने पर व्यक्ति के खिलाफ पुलिस थाना बैजनाथ में 18-सी ड्रग कॉस्मेटिक एक्ट 1940 के तहत केस दर्ज किया गया है, जानकारी के अनुसार ड्रग इंस्पेक्टर व पुलिस जांच के बाद केस विशेष

ड्रग इंस्पेक्टर आशीष रैणा की रिपोर्ट के आधार पर न्यायालय

जज एवं जिला सत्र न्यायधीश जेके शर्मा की अदालत में पहुंचा है तथा न्यायालय में अभियोजन पक्ष की ओर से पेश किए गए 03 गवाहों व ड्रग इंस्पेक्टर आशीष रैणा की रिपोर्ट के आधार पर न्यायालय ने दोषी बिहारी लाल

को 03 साल का कारावास तथा 01 लाख रुपए के जुर्माना की सजा सुनाई है, तथा अन्य निजी क्लीनिको की भी जांच की जा रही है, ताकि लोगो की सेहत से किसी भी प्रकार का कोई खिलवाड़ ना हो पाए।

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