चम्बा की मक्की की पारंपरिक किस्मों को भौगोलिक सूचक पंजीकरण में शामिल करने की तैयारी

हिमाचल प्रदेश के जिला चंबा की सलूणी घाटी को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जल्द एक नई पहचान मिलने जा रही है, प्राप्त जानकारी के अनुसार बताया जा रहा है की यहां की मक्की की पारंपरिक किस्मों की खेती के जरिए आज के इस दौर में भी उनका संरक्षण करने वाले किसानों के संघ, सलूणी सफेद मक्का संगठन की सोच और प्रयास रंग लाए हैं।

जियोग्राफिकल इंडिकेशन टैग यानि भौगोलिक सूचक पंजीकरण मिलने की उम्मीद

साथ ही बताया जा रहा है की चम्बा जिला प्रशासन के सहयोग से अब स्वाद और गुणवत्ता से भरपूर मक्की की पारंपरिक किस्मों को जियोग्राफिकल इंडिकेशन टैग यानि भौगोलिक सूचक पंजीकरण मिलने की उम्मीद पूरी होने वाली है, जिससे सलूणी के किसानो को बेहद राहत मिलने वाली है, जानकारी के अनुसार कहा जा रहा है कि सलूणी क्षेत्र की जिन पंचायतों में मक्की की पारंपरिक किस्में उगाई जा रही हैं।

कृषक अधिकार संरक्षण प्राधिकरण द्वारा 10 लाख की राशि का पादप जीनोम संरक्षक सामुदायिक पुरस्कार प्राप्त

इनमें भांदल, सनूंह, किहार, डांड, पिछला डियूर, कंधवारा, भड़ेला, खड़जौता, हिमगिरि, पंजेई, किलोड़ और सूरी पंचायतें शामिल हैं, हिमाचल प्रदेश के जिला चंबा की सीमांत भांदल पंचायत भारत सरकार के कृषि एवं कृषक कल्याण मंत्रालय के पौधा किस्म और कृषक अधिकार संरक्षण प्राधिकरण द्वारा 10 लाख की राशि का पादप जीनोम संरक्षक सामुदायिक पुरस्कार प्राप्त कर चुकी है।

इस किस्मों को चम्बा के 12 पंचायतों के 158 हेक्टेयर क्षेत्रफल में बोया जाता है

इसके साथ ही कहा जा रहा है की इससे पूर्व भारत सरकार द्वारा पौधा किस्म रजिस्ट्री के तहत इन्हें रजिस्ट्रीकरण प्रमाण पत्र दिया गया था, प्राप्त जानकारी के अनुसार मक्की की इन किस्मों को 12 पंचायतों के 158 हेक्टेयर क्षेत्रफल में बोया जाता है, साथ ही विशेष तौर से सफेद मक्की प्रोटीन से भरपूर मानी जाती है तथा इस किस्म में क्रूड फाइबर नामक तत्त्व भी पाया जाता है।

यह मक्की डायबिटीज को भी नियंत्रित करने में बेहद सहायक

जो मानव पाचन तंत्र के लिए तो मुफीद है ही, इसके अलावा यह डायबिटीज को भी नियंत्रित करने में बेहद सहायक है, कहा जा रहा है की एक अध्ययन के मुताबिक मक्की हृदय स्वास्थ्य के लिए भी बेहतर रहती है, साथ ही इसमें विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट की प्रचूर मात्रा होती है, चम्बा की इस मक्की को सफेद मक्का संगठन से मक्की की इन पारंपरिक किस्मों की जियोग्राफिकल इंडिकेशन रजिस्ट्रेशन के लिए प्रस्ताव मिला था।

पर्यावरण परिषद के पेटेंट इन्फॉर्मेशन सेंटर को प्रेषित

साथ ही इस प्रस्ताव को सभी अध्ययनों और तथ्यों के साथ हिमाचल प्रदेश राज्य विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं पर्यावरण परिषद के पेटेंट इन्फॉर्मेशन सेंटर को प्रेषित किया गया था, हिमाचल प्रदेश के चम्बा जिला के लिए खुशी का विषय है कि इस मामले को अब जियोग्राफिकल इंडिकेशन पंजीकरण के लिए चेन्नई स्थित रजिस्ट्रार के कार्यालय को भेज दिया गया है, जिससे चम्बा की इस मक्की की पारंपरिक किस्मों को जियोग्राफिकल इंडिकेशन टैग यानि भौगोलिक सूचक पंजीकरण मिलने की पूरी उम्मीद है।

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