मंडी शिवरात्रि में हर रोज 6000 लोगों के लिए मंडयाली धाम तैयार की जा रही

हिमाचल प्रदेश के जिला मंडी में न प्याज न लहसुन, फिर भी जायका ऐसा कि मन की तृप्ती हो जाए, इसी एक साथ प्राप्त जानकारी के अनुसार हिमाचल प्रदेश में 06 क्विंटल चावल और 07 प्रकार के भोग बनाने के लिए

दिन-रात डटी 32 लोगों की टीम ने देवी-देवताओं के नाम पर तैयार भोग और हर रोज भूमि पर बैठकर हरी पत्तल में भोजन ग्रहण करते हजारों लोग पहुंच रहे है।

6000 लोगों के लिए धाम तैयार करने में जितनी कड़ी मेहनत करनी पड़ रही

इसी के साथ कहा जा रहा है की यह दृश्य अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव मंडी में हर रोज देवलुओं के लिए बनाई जाने वाली मंडयाली धाम की विशाल रसोई का है, साथ ही यहां हर रोज 6000 लोगों के लिए मंडयाली धाम

तैयार की जा रही है, जिस का स्वाद लेने के लिए देश भर से सैलानी पहुंच रहे है, इसी के साथ कहा जा रहा है की विशेष बात यह है कि 6000 लोगों के लिए धाम तैयार करने में जितनी कड़ी मेहनत करनी पड़ रही है।

मंडी के शिवरात्रि महोत्सव में हर रोज की धाम का खर्च डेढ़ लाख रुपए के लगभग बैठता

प्राप्त जानकारी के अनुसार बताया जा रहा है की उतनी की मेहनत 6000 लोगों को खाना खिलाने के लिए करनी पड़ती है, साथ ही कहा जा रहा है की मंडी के शिवरात्रि महोत्सव में हर रोज की धाम का खर्च डेढ़ लाख रुपए के

लगभग बैठता है, साथ ही कहा जा रहा है की वर्षो से चली आ रही इस रीत को छोटी काशी के कुछ दानी परिवार मंडी जिला प्रशासन के सहयोग से निभाते आ रहे हैं।

हर रोज साढे़ पांच से लेकर 06 क्विंटल चावल पकाए जाते

साथ ही कहा जा रहा है की शिवरात्रि महोत्सव के सातों दिन धाम तैयार करवाई जाती है, साथ ही कहा जा रहा है की मंडयाली धाम को बिना प्याज और लहसुन के

बनाया जाता है, साथ ही इसमें हर रोज साढे़ पांच से लेकर 06 क्विंटल चावल पकाए जाते हैं।

120 किलोग्राम से अधिक खट्टा कद्दू बनाया जाता

साथ ही इसके बाद 60 किलो सेपू बड़ी तैयार की जाती है, इसी के साथ कहा जा रहा है कि 25 किलो बदाणे से मीठा तैयार किया जाता है, जबकि 120 किलोग्राम से अधिक खट्टा कद्दू बनाया जाता है, जिसमें 20 किलो से

अधिक खजूर ही पड़ते हैं, साथ ही बताया जा रहा है की 45 किलो राजमाह, 30 किलो कोहल, 35 किलो माह की दाल और 120 लीटर लस्सी से झोल तैयार करवाया जाता है।

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