काँगड़ा जिले में स्तिथ “त्रिगत किला” एक ऐतिहासिक स्थल, “Trigat Fort” a historical site in Kangra district of Himachal Pradesh

हिमाचल प्रदेश में बहुत से ऐतिहासिक स्थान जो बेहद आकर्षित और लोकप्रिय पर्टयक स्थानों में से एक है, ऐसा ही एक किला है, हिमाचल प्रदेश के काँगड़ा जिले में जिस का ऐतिहासक नाम, त्रिगत, और नगर कोट नाम से जाना जाता था।इस ऐतिहासिक कांगड़ा किले का निर्माण कांगड़ा प्रान्त के (कटोच वंश) के शाही राजपूत परिवार द्वारा किया गया था। जिसकी जानकारी महाभारत महाकाव्य में उल्लिखित प्राचीन त्रिगर्त साम्राज्य द्वारा इसकी उत्पत्ति का पता लगाता है।

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यह इस हिमालय का सबसे बड़ा किला है, मान्यता है की यह शायद भारत का सबसे पुराना किला है। कांगड़ा का यह ऐतिहासिक किला हजारों साल की भव्यता, आक्रमण, युद्ध, धन और विकास का गवाह रहा है। यह शक्तिशाली किला प्राचीन त्रिगर्त साम्राज्य की उत्पत्ति के बारे में बताता है।

पंजाब और हिमाचल के प्रमुख हिल स्टेशनों में से एक था यह किला, This fort was one of the major hill stations of Punjab and Himachal

कांगड़ा में स्तिथ इस किले ने 1615 में अकबर की घेराबंदी का विरोध किया था। जबकि ऐतिहासिक जानकारी के अनुसार अकबर के बेटे जहांगीर ने 1620 में चंबा के राजा के क्षेत्र में सभी राजाओं में सबसे महान राजाओ को जमा करने के लिए किले को सफलतापूर्वक तोड़ दिया था। मुगल सम्राट जहांगीर ने सूरज मल की मदद से अपने सैनिकों के साथ इस किले में भाग लिया। काँगड़ा किला ब्यास और उसकी सहायक नदियों की निचली घाटी पर कब्जा करते हुए, यह पहले पंजाब और हिमाचल के प्रमुख हिल स्टेशनों में से एक था।

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महराजा संसार चंद के शक्तिशाली शासन का प्रमाण देता है यह किला, This fort testifies to the powerful rule of Maharaja Sansar Chand

यहां के शक्तिशाली कटोच राजाओं ने मुगल नियंत्रण वाले क्षेत्रों को बार-बार लूटा और मुगल नियंत्रण को कमजो कर दिय। मुगल शक्ति के पतन के साथ राजा संसार चंद द्वितीय ने 1789 में अपने पूर्वजों के प्राचीन इस किले को पुनर्प्राप्त किया और अपना शाशन इस किले में स्थापित किया। महाराजा संसार चंद ने गोरखाओं के साथ भी बहुत सी कई लड़ाइयां लड़ीं। और साथ ही दूसरे सिख राजा महाराजा रणजीत सिंह थे। संसार चंद अपने पड़ोसी राजाओं को एक विशेष जेल में रखते थे, और इसी के चलते उनके खिलाफ बहुत से राजा षड्यंत्र रचे जाते थे। कहा जाता है, की सिखों और कटोच के बीच लड़ाई के दौरान किले के द्वार आपूर्ति के लिए खुले रखे गए थे। 1806 में गोरखा सेना ने खुले तौर पर सशस्त्र फाटकों में प्रवेश किया।

सिखो और ब्रिटिश के अधीन भी रहा यह किला, This fort was also under Sikhs and British

जिसके कारण महाराजा संसार चंद और महाराजा रणजीत सिंह के बीच गठबंधन को मजबूर कर दिया। जिसके चलते 1809 में गोरखा सेना हार गई, और उन्हें सतलुज नदी के पार जाना पड़ा। इस ऐतिहासिक किले में 1828 तक कटोच के साथ रहे जब रणजीत सिंह ने संसार चंद की मृत्यु के बाद इसे रद्द कर दिया। उसके बाद पुनः सिखो द्वारा इस किले को जीत लिया गया और 1846 के सिख युद्ध के बाद किले को अंततः ब्रिटिश सम्राज्य ने इस किले को अपने अधीन ले लिया।

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इस विशाल किले पर कई बार हमला हुआ, This huge fort was attacked many times

एक ब्रिटिश शासन के दौरान इस किले में 4 अप्रैल 1905 को एक भयकंर भूकंप आया जिस से इस किले को भरी मात्रा में नुक्सान हुआ। इस ऐतिहसिक किले में एक समय में गर्भगृह में अकल्पनीय धन था, जो किले के अंदर बृजेश्वरी मंदिर में बड़ी मूर्ति को चढ़ाया जाता था। इसी कारण इस किले में स्तिथ खज़ानों के कारण, इस विशाल किले पर कई बार हमला भी हुआ है। जिस बजह से लगभग हर शासक ने इस किले में आक्रमण किया है। और काँगड़ा किले में अपना नियंत्रण रखने की कोशिश की है। अभी भी यह किला वास्तुशिल्प चमत्कार की संरचना और अद्भुत सौंदर्य के लिए जाना जाता है। कांगड़ा किला अपनी भव्यता और रॉयल्टी का प्रतीक है।

पर्टयकों के लिए एक रोमांचित स्थान, A thrilling place for tourists

ऐतिहासकि प्रेमियों के लिए यह एक आदर्श स्थान माना जाता है, हर साल बहुत से सैलानी यहां गुमने और समय व्यतीत करने के लिए आते है। यहां भ्रमण करने के लिए पर्टयकों के लिए यह किला सुबह 9 बजे से लेकर शाम के 6 बजे तक खुला रहता है, इस बिच आप कभी बभी यहां आ कर इस किले का सौंदर्य निहार सकते है। जो आप को बेहद रोमांचित करेगा।

Abhishek Pathania

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