किब्बर वन्यजीव अभयारण्य, Kibber Wildlife Sanctuary in Hindi

हिमाचल प्रदेश की लाहौल स्पीति जिले में स्तिथ यह वन्य जिव अभ्यारण हिमाचल प्रदेश में स्तिथ मुख्य जिव अभ्यारणों में से एक है। यह वन्यजीव सरक्षण अधीनियम।1972 के तहत संग्रक्षित स्थान है। इस अभ्यारण में बहुत से जानवर और पशु सुरक्षित है। यह स्थान काज़ा से 16 किलोमीटर की दुरी में स्तिथ है। यह स्थान अपने सौंदर्य और वातावरण के लिए पुरे देश भर में जाना जाता है। कज़ा गुमे आये पर्टयक इस स्थान में जाना नहीं भूलते क्युकी यहां बहुत से उच्च हिमलाय में पाए जाने वाले जानवर मौजूद है। जो काजा गुमने आये पर्टयकों को अपने और आकर्षित करता है।

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किब्बर वन्यजीव अभयारण्य की स्थापना, Establishment of Kibber Wildlife Sanctuary

हिमाचल में स्तिथ यह किब्बर वन्यजीव अभयारण्य 1992 में स्थापित किया गया था। इस अभ्यारण का क्षेत्र 1400 वर्ग किलोमीटरर में फैला हुआ है। इस खूबसूरत अभ्यारण में लगभग चालीस हिम तेंदुए खोजे गए हैं। जो यहां आये सैलानियों को अद्भुत दृश्य प्रदान करते है। इसके अलावा यहां और भी बहुत से जानवर पाए जाते है।

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जैसे तिब्बती जंगली गधा और लाल लोमड़ी, तिब्बती वुल्फ, इबेक्स, तिब्बती वूली हरे, पेल वीसेल, भारल, भी यहां पाई जाने वाले प्रजाति है। हिमालयन बर्ड्स, जैसे ग्रिफन्स, और स्नो कॉक दाढ़ी वाले ईगल भी इस अभयारण्य में देखने को मिलते है। यह जगह पारंपरिक दवाओं और सौंदर्य प्रसाधनों बनने में इस्तेमाल होने वाले दुर्लभ और लुप्तप्राय औषधीय पौधों की प्रजातियों का स्थान है। यदि आप हिमाचल प्रदेश आने का प्लान बना रहे है तो इस स्थान में आना ना भूले।

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किब्बर वन्यजीव अभयारण्य आने का सही समय और दुरी, Right time to visit Kibber Wildlife Sanctuary

यह स्थान आप को प्रकृति के बहुत नजदीक ले जाएगा। और आप बहुत से जानवरो को देख पाएंगे और उन की खूबसूरत तस्वीरें ले पाएंगे। इस अभ्यारण की खास बात यह है की यह स्थान उच्च हिमालय में स्तिथ है। जिस करण यहां तापमान अधीकतर तण्डा ही रहता है। गर्मियों में भी यहा कुछ ज्यादा गर्मी नहीं होती जिस बजह से यह स्थान पर्टयकों का लोकप्रिय स्थान है। यहां आने का समय गर्मियों में ही सही रहता है। सर्दियों में ज्यादा बर्फबारी की दौरान यहां आने के सभी सड़क रास्ते बंद हो जाते है। यह स्थान दिल्ली से 723 किलोमीटर की दुरी पर स्तिथ है। मनाली से इस अभ्यारण्य की दुरी 188 किलोमीटर है।

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About the Author: Tarsem Dadhwal